अंतरंग/antarang

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अंतरंग  : वि० [अंतर्-अंग ब० स०] १. जो अन्दर हो अथवा जिसका संबंध अन्दर से हो। भीतरी। बहिरंग का विपर्याय। २. भीतरी या गुप्त बातों को जानने या उनसे संबंध रखने वाला। जैसे—अंतरंग सभा। पुं० [मध्य सं० ] १. शरीर के भीतरी अंग। जैसे—मन, मस्तिष्क आदि। २. आत्मीय, स्वजन। ३. बहुत घनिष्ट मित्र।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
अंतरंग-मंत्री  : (त्रिन्)- पुं० [कर्म स०] किसी बहुत बड़े अधिकारी का निजी सचिव (प्राइवेट सेक्रेटरी)।
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अंतरंग-सभा  : स्त्री० [कर्म० स०] १. किसी संस्था के भीतरी बातों की व्यवस्था करने और उसकी नीति आदि स्थिर करने वाली सभा। २. कार्य-कारिणि या प्रबन्ध-कारिणि समिति।
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अंतरंगी (गिन्)  : वि० [सं० अंतरंग+इनि] १. भीतरी। २. दिली, हार्दिक। पुं० घनिष्ट मित्र, गहरा दोस्त।
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