अंतर्भाव/antarbhaav

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अंतर्भाव  : पुं० [मध्य० स०] [भू० कृ० अंतर्भावित, अंतर्भुक्त, अंतर्भूत] १. किसी का किसी दूसरे में समा या आ जाना। सम्मिलित, समाविष्ट या अंतर्गत होना। (इन्कलूजन) २. छिपाव, दुराव। ३. अभाव। ४. जैन दर्शन में कर्मों का क्षय जो मोक्ष का सादक होता है। ५. नात का आशय। मतलब।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
अंतर्भावना  : स्त्री० [मध्य० स०] [भू० कृ० अंतर्भावित] मन ही मन किया जानेवाला चिंतन या ध्यान।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
अंतर्भावित  : भू० कृ० [सं० अंतर भू (होना) +णिच्+क्त] १. जो अंदर मिलाया गया हो या मिल गया हो। २. विशिष्ट क्रिया से किसी के साथ दृढ़तापूर्वक मिलाया या लगाया हुआ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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