अचर/achar

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अचर  : वि० [सं० न० त०] [भाव० अचरता] १. जो चर न हो। न चलने वाला। २. जो चल न सकता हो। पुं० वह जो न चलता हो या न चल सकता हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
अचरज  : पुं० [सं० आशचर्य, प्रा० अच्चरिय] १. किसी बात या वस्तु के अप्रत्याशित रूप से या सहसा होने पर मन में होने वाला कुतुहल-जनक भाव। आश्चर्य। २. चकित करने वाली कोई विलक्षण बात या वस्तु। वि० आश्चर्य उत्पन्न करनेवाला। अनोखा। विलक्षण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
अचरा  : स्त्री० [सं० अंचल] कपड़े का आँचल। दे० आँचल। मुहावरा— (किसी का) अचरा गहना=(किसी का) पल्ला पकड़ना। (दे०)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
अचरित  : भू० कृ० [सं०√चर् (गति)+क्त, न० त०) १. (क्षेत्र या भूमि) जिस पर कोई चला न हो। २. सदा अपने स्थान पर बना रहने वाला। अचर। अचल। ३. सदा बना रहने वाला। शाश्वत। जैसे—आत्मा या ब्रह्म। ४. जिसका आचरण या व्यवहार न किया गया हो। ५. जो खाया न गया हो।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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