अपवाद/apavaad

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अपवाद  : पुं० [सं० अप√वद् (बोलना)+घञ्] १. किसी बात के विरुद्ध कही हुई बात। विरोध या खंडन। २. ऐसी लोक-निंदा जिससे किसी के सम्मान को आघात पहुँचे। बदनामी। (ऑब्लोकी) ३. दोष। बुराई। ४. वह बात जो किसी व्यापक या सामान्य नियम के अंतर्गत आकर उसके विरुद्ध या उसके अतिरिक्त पड़ती हो। ५. राय। विचार। ६. विश्वास। प्रणय। ७. मिथ्या बात। ८. आदेश। आज्ञा। ९. वेदांत शास्त्र के अनुसार अध्यारोप का निराकरण। जैसे—रज्जु में सर्प का ज्ञान यह अध्यारोप है, रज्जु के वास्तविक ज्ञान से उसका जो निराकरण हुआ वह अपवाद है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
अपवादक  : पुं० [सं० अप√वद्+ण्वुल्—अक] वह जो दूसरों का अपवाद या बदनामी करे। पर-निंदक। वि० १. अपवाद रूप में होनेवाला। २. विरोधी। ३. बाधक।
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अपवादिक  : वि० [सं० आपवादिक] १. अपवाद संबंधी। २. सामान्य नियम के विरुद्ध अथवा अपवाद के रूप में होनेवाला। (एक्सेप्शनल) ३. दे० ‘अपवादक’।
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अपवादित  : भू० कृ० [सं० अप√वद्+णिच्+क्त] १. जिसका विरोध किया गया हो। २. निंदित।
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अपवादी (दिन्)  : वि० [सं० अप√वद्+णिच्+णिनि] दे० ‘अपवादक’।
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