अभुक्त-मूल/abhukt-mool

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अभुक्त-मूल  : पुं० [सं० कर्म० स०] ज्येष्ठा नक्षत्र के अंत की दो घड़ियाँ और मूल नक्षत्र के आदि की दो घड़ियाँ जिन्हें गंडाल भी कहते हैं। (ज्यो०)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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