अव्यय/avyay

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अव्यय  : वि० [सं० वि√इ (गति)+अच्, न० त०] १. जिसमें कभी कोई व्यय या विकार न होता हो। सदा एक-सा रहनेवाला। विकारशून्य और नित्य। २. जिसका न आदि हो और न अंत। ३. जिसका प्रवाह सदा चलता रहे। ४. जो परिणाम से रहित हो। पुं० १. व्यय न होना। २. व्याकरण में, वह शब्द जिसका प्रयोग सभी लिंगों, विभक्तियों और वचनों में सदा एक ही रूप में होता हो। वह शब्द जिसके रूप में परिवर्तन न होता हो। जैसे—कुछ, कोई, किंतु, परंतु, सदा आदि। २. पर-ब्रह्म। ३. विष्णु। ४. शिव।
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अव्ययीभाव  : पुं० [सं० अव्यया+च्वि√भू (होना)+घञ्] व्याकरण में, समास का वह प्रकार जिसमें अव्यय के साथ उत्तर पद समस्त होता है। जैसे—अतिकाल, अनुरूप, प्रतिरूप आदि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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