काव्या/kaavya

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काव्या  : स्त्री० [सं० √कव् (वर्णन करना)+ण्यत्, टाप्] १. अक्ल। बुद्धि। २. पूतना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
काव्यार्थापत्ति  : स्त्री० [काव्०-अर्थापत्ति, ष० त०] साहित्य में एक अलंकार जिसमें किसी दुष्कर अर्थ की सिद्धि के वर्णन से साधारण अर्थ की सिद्धि स्वतः होने का कथन होता है। उदाहरण—तुम माता हो कि अन्य हो, पूजनीया मेरी हो सदैव जाति नारी की मातृभाव से ही पूजता मैं रहा।—लक्ष्मीनारायण मिश्र।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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