गरज/garaj

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गरज  : स्त्री० [सं० गर्जन] १. गरजने की क्रिया या भाव। २. बहुत गंभीर या घोर शब्द। जैसे–बादल या सिंह की गरज। स्त्री० [अ०] १. किसी उद्देश्य या प्रायोजन की सिद्धि के लिए मन में होनेवाली स्वार्थजन्य इच्छा। मुहावरा–(अपनी) गरज गाँठना=अपना स्वार्थ सिद्ध करना। पद-गरज का बावल=स्वार्थांध। २. आवश्यकता। जरूरत। अ० य० १. इतना होने पर। आखिरकार। २. तात्पर्य यह है कि।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
गरजन  : पुं० [सं० गर्जन] गरजने की क्रिया या भाव। गरज।
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गरजना  : अ० [सं० गर्ज्; प्रा० गज्ज; सिं० गाज; गु० गाजबूँ; पं० गज्जणा; मरा० गाज (णें)] १. गंभीर तथा घोर शब्द करना। जैसे–बादल या सिंह का गरजना। २. (किसी वस्तु का) चटकना, तडकना या फूटना। जैसे–मोती गरजना।
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गरजुआ  : पुं० [हिं० गरजना] एक प्रकार की खुमी।
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गरजू  : वि० =गरजमंद।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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