गोख/gokh

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गोख  : पुं० [सं० गवाक्ष] झरोखा। (राज०) उदाहरण–ऊखी गोख अवेखियौ पेलां रौदल सेर।–कविराजा सूर्यमल।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
गोखग  : पुं० [सं० गो और खग] पशु और पक्षी।
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गोखरू  : पुं० [सं० गोक्षुर] १. एक प्रकार का क्षुप जिसके चने के आकार के बराबर कड़े और कँटीले फल लगते हैं। २. उक्त क्षुप के फल जो दवा के काम आते है। ३. उक्त फलों के आकार के धातु के बने हुए वे कँटीले दाने जो मस्त हाथियों को वश में करने के लिए उनके रास्ते में बिछाये जाते है। ये दाने हाथी के पैरों में चुभकर उन्हें चलने या भागने नही देते। ४. गोटे और बादले से बनाया हुआ उक्त आकार का वह साज जो कपड़ों में शोभा के लिए टाँका जाता है। ५. शरीर के किसी अंग में काँटा गड़ने या कोई रोग होने के कारण बना हुआ कड़ा गोलाकार उभार। ६. पौधों की बाल। ७. हाथ में पहनने के कड़े के आकार का एक गहना। ८. कान में पहनने का एक प्रकार का गहना।
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गोखा  : पुं० [सं० गवाक्ष] झरोखा। पुं० [सं०गो से] गौ या बैल का कच्चा चमड़ा।
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गोखुरा  : पुं० [सं० गोक्षुर] साँप।
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