गोली/golee

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गोली  : स्त्री [हिं० गोला का स्त्री० और अल्पा०] १. कोई छोटा गोला या गोलाकार पिंड। वटिका। जैसे–दवा की गोली, बंदूक की गोली, रेशम या सूत की गोली। २. मिट्टी का वह छोटा गोलाकार पिंड जिससे बच्चे कई तरह के खेल खेलते हैं। ३. उक्त पिड़ों से खेला जानेवाला खेल। ४. उक्त प्रकार का शीशे का वह गोलाकार या लंबोतरा पिंड जो तमंचों, बंदूकों आदि से शत्रुओं को मारने अथवा पशु-पक्षियों का शिकार करने के लिए चलाया जाता है। मुहावरा–गोली खाना बंदूक आदि की गोली का आघात सहना। (किसी काम या व्यक्ति को) गोली मारना =उपेक्षा या तिरस्कार पूर्वक दूर हटाना। जैसे–गोली मारो ऐसे नौकर को। ५. किसी प्रकार का घातक वार। मुहावरा–गोली बचाना किसी संकट या आपत्ति से धूर्ततापूर्वक अपना बचाव कर लेना। स्त्री० [?] मिट्टी का छोटा घडा। ठिलिया। २. पीले या बादामी रंग की गौ। ३. पशुओं का एक प्रकार का रोग। स्त्री० [सं० गोला=सखी] १. मध्ययुग में वह स्त्री जो वधुओं की सहेली के रूप में उसके साथ ससुराल भेजी जाती थी। विशेष–ऐसी स्त्रियाँ प्रायः दासी वर्ग की होती थीं। आगे चलकर राजस्थान आदि में ऐसी दासियों की एक अलग जाति या वर्ग ही बन गया था, जो पूर्ण रूप से दास ही माना जाने लगा था। भारत में स्वराज्य होने और सामंतशाही का अंत होने पर समाज का यह वर्ग भी स्वतन्त्र हो गया। २. छोटी-मोटी सेवाएँ या टहल करनेवाली दासी। पुं० [अ० गोल] फुटबाल, हाकी आदि का वह खिलाड़ी जो गोल में खड़ा होता है तथा उसमें गेंद जाने से रोकता है। (गोलकीपर)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
गोलीय  : वि० [सं० गोल+छ-ईय] १. गोल-संबंधी। २. खगोल भूगोल आदि से संबंध रखनेवाला।
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