चढ़ाव/chadhaav

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चढ़ाव  : पुं० [हिं० चढ़ना] १. चढ़ने या चढ़ाने की क्रिया या भाव। पद-चढ़ाव-उतार =ऊँचा नीचा स्थान। २. बराबर आगे या ऊपर की ओर होनेवाली गति। ३. बढ़ती। वृद्धि। पद-चढ़ाव-उतार=(क) एक ओर मोटे और दूसरी ओर पतले होने का भाव। (ख) उन्नति और अवनति। ४. दर या भाव की तेजी। ५. वह दिशा जिधर से जल-धारा आ रही हो। ६. स्वर का आरोह. ७. काम-वासना। ८. दरी के करघे का वह बाँस जो बुनने वाले के पास रहता है। ९. दे० ‘चढ़ावा’ १ और २।
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चढ़ावा  : पुं० [हिं० चढ़ाना] १. वे आभूषण जो विवाह के समय कन्या को पहनने के लिए वर-पक्ष के घर से आते हैं। २. कन्या को विवाह के समय उक्त आभूषण पहनाने की एक रीति। ३. वे चीजें जो श्रद्धापूर्वक किसी देवता को चढ़ाई जाएँ। पुजापा। ४. उत्तेजना। बढ़ावा। ५. टोटके की वह सामग्री जो बीमारी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए किसी चौराहे या गाँव के किनारे रखी जाती है। उतारा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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