चीढ़/cheedh

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चीढ़  : पुं० [सं० चीढ़ा] एक प्रसिद्ध बड़ा पेड़ जिसकी चिकनी और नरम लकड़ी इमारत और संदूक बनाने के काम आती है। इस लकड़ी में तेल का अंश अधिक होता है जो निकाला जाता और ताड़पीन के तेल के नाम से बिकता है। गंधा बिरोजा इसी पेड़ का गोंद है। इसके कुछ अंशों का प्रयोग ओषध गंध-द्रव्य आदि के रूप में भी होता है। पुं०=चीड़ (लोहा)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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