छाल/chhaal

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छाल  : स्त्री० [सं० पा० प्रा० छल्ली] वृक्षों आदि के तने पर का कड़ा, खुरदरा और मोटा छिलका। पुं० चिट्ठी या पत्र (जो पहले छाल पर लिखा जाता था)। पुं० छाला। चर्म। उदाहरण–बैठ सिंध छाला होइ तपा।–जायसी। स्त्री०=उछाल। पश्चिम)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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छालक  : वि० [सं० छालक] [स्त्री० छालिका] धोने या धोकर साफ करनेवाला। उदाहरण–त्रिपथ गासि पुन्य रासि पाद–छालिका।–तुलसी।
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छालटी  : स्त्री० [हिं० छाल] एक प्रकार का कपड़ा जो अलसी आदि के रेशों से बनाया जाता है।
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छालित  : भू० कृ० [सं० प्रक्षालित] धोया अथवा साफ किया हुआ।
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छालिया  : वि० [सं० स्थाली] एक प्रकार की छिछली तथा छोटी कटोरी। पुं० [?] १. सुपारी केकटे हुए छोटे-छोटे टुकड़े। २. बादाम, पिस्ते आदि के एक में मिले हुए छोटे टुकड़े।
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छाली  : पुं=छागल (बकरी)।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
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