टक्कर/takkar

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टक्कर  : स्त्री० [प्रा०] १. दो या अधिक चीजों के आपस में टकराने की अवस्था, क्रिया या भाव २. एक ही सीध में, परन्तु दो विपरीत दिशाओं में वेगपूर्वक आगे बढ़ने या चलनेवाली दो वस्तुओं, व्यक्तियों आदि के अगले भाग या सिरे के सहसा एक दूसरे से टकराने या भिड़ने की अवस्था, क्रिया या भाव। जैसे–रेल-गाड़ियों की टक्कर ३. बल-परीक्षा, मनोविनोद, व्यायाम आदि के लिए दो प्राणियों के आपस में मस्तक या सिर से एक दूसरे पर आघात करने या धक्का देने की क्रिया या भाव। क्रि० प्र–लड़ना।–लड़ाना। ४. वेगपूर्वक आगे बढ़ने के समय किसी वस्तु या व्यक्ति के अगले या ऊपरी भाग का मार्ग में पड़नेवाली किसी बड़ी या भारी चीज के साथ इस प्रकार लगनेवाली ठोकर या होनेवाली भिडन्त कि उनमें से किसी एक अथवा दोनों को किसी प्रकार की आघात लगे। जैसे–अँधेरे में चलते समय खंभे या दीवार से लगनेवाली टक्कर। मुहावरा–इधर-उधर टक्करें खाना या मारना=जगह-जगह मारे-मारे फिरना। दुर्दशा भोगते हुए कभी कहीं और कभी कहीं आना जाना। ५. बराबर के दो पक्षों में होनेवाला ऐसा मुकाबला या सामना जिसमें दोनों एक दूसरे को गिराना या दबाना चाहते हों या उन्हें हानि पहुँचाना चाहते हों। जैसे–दो देशों या विचार धाराओं में होनेवाली टक्कर। पद–टक्कर का=जोड़, बराबरी या मुकाबले का। जैसे–भगवद्गीता या रामचरितमानस की टक्कर की पुस्तक विश्व-साहित्य में मिलना दुर्लभ है। मुहावरा–(किसीसे) टक्कर लेना=बराबरी या मुकाबला करना। जैसे–यह घोड़ा दौड़ में रेलगाड़ी से टक्कर लेता है। ६. घाटा। हानि। (क्व०)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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