ढंकना/dhankana

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ढकना  : स० [सं० स्थग, प्रा० ढक्क, ढकण] १. किसी चीज के ऊपर या सामने कोई ऐसी आड़ या आवरण खड़ा करना कि वह चीज ऊपर या बाहर न दिखाई से पड़े अथवा सुरक्षित रहे। जैसे–(क) देगची को कटोरी या ढक्कन से ढकना। (ख) कपड़े से दूध या मलाई ढकना। २. ओढ़े या पहने हुए वस्त्र से शरीर का कोई अंग छिपाना। जैसे–घूँघट से मुँह ढकना अथवा चादर से छाती ढकना। ३. किसी चीज के ऊपर किसी दूसरी बात का आकर उसे आड़ में करना। जैसे–बादलों का आसमान को ढकना। ४. लाक्षणिक अर्थ में, ऐसा उपाय करना जिससे दूसरे के सामने दूषित बात या रूप न प्रकट होने पावे। जैसे–किसी की इज्जत या ऐब ढकना। अ० आड़ आवरण आदि के कारण ऐसी स्थिति में होना कि ऊपर या बाहर से दिखाई न दे अथवा वातावरण आदि के प्रभाव से रक्षित रहे। जैसे–कपड़े या कागज से ढकी हुई मिठाई। पुं० [स्त्री० अल्पा० ढकनी] वह चीज या रचना जिससे कोई चीज ढकी जाती है। ढक्कन। जैसे–डिब्बे या सन्दूक का ढकना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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