ताक-झांक/taak-jhaank

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ताक-झांक  : स्त्री० [हिं० ताकना+झाँकना] १. टोह, लेने, ढूँढ़ने, पाने आदि के उद्देश्य से रह-रहकर इधर-उधर बराबर ताकते या देखते और झांकते रहने की क्रिया या भाव। २. छिपकर या औरों की दृष्टि बचाकर बुरे भाव से ताकने की क्रिया या भाव।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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