परिज्ञा/parigya

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परिज्ञा  : स्त्री० [सं० परि√ज्ञा (जानना)+अङ्—टाप्] १. ज्ञान। २. निश्चयात्मक, विशुद्ध और संशय-रहित ज्ञान।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
परिज्ञात  : भू० कृ० [सं० प्रा० स०] अच्छी तरह या विशेष रूप से जाना हुआ।
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परिज्ञाता (तृ)  : पुं० [सं० परि√ज्ञा+तृच्] वह जिसे परिज्ञान हो।
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परिज्ञान  : पुं० [सं० प्रा० स०] १. किसी चीज या बात का ठीक और पूरा ज्ञान। पूर्ण या सम्यक् ज्ञान। २. ऐसा ज्ञान जिसका भरोसा किया जा सके। निश्चयात्मक और सच्चा ज्ञान। ३. अंतर, भेद आदि के संबंध में होनेवाला सूक्ष्म ज्ञान।
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