पलटना/palatana

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पलटना  : अ० [सं० प्रलोटन] १. ऐसी स्थिति में आना या होना कि ऊपरी अंश या तल नीचे हो जाय और निचला अंश या तल ऊपर हो जाय। उलटा या औंधा होना। २. दशा, परिस्थिति आदि में होनेवाला इस प्रकार का बहुत बड़ा परिवर्तन कि उसका प्रवाह, रूख या रूप बिलकुल उलट जाय। अच्छी से बुरी या बुरी से अच्छी स्थिति को प्राप्त होना। ३. अपेक्षाकृत अवनत स्थिति को प्राप्त होना। ४. राज्य की सत्ता का एक के हाथ से निकलकर दूसरे के हाथ में जाना। जैसे—शासन पलटना। ५. पीछे या विपरीत दिशा की ओर जाना, घूमना या मुड़ना। ६. जहाँ से कोई चला हो, उसका उसी स्थान की ओर लौटना। वापस आना। ७. कही हुई या मानी हुई बातें मानने से पीछे हटना। मुकरना। जैसे—उन्हें पलटते देर नहीं लगती। संयो० क्रि०—जाना। स० १. उलटा या औंधा करना। २. आकार, रूप, दशा, स्थिति आदि को प्रयत्नपूर्वक बदल देना। बदलना। ३. अवनत को उन्नत या उन्नत को अवनत करना। ४. किसी को लौटने में प्रवृत्त करना। फेरना। ५. अदल-बदल करना। विशेष—यह उलटना के साथ उसका अनुकरण-वाचक रूप बनकर भी प्रयुक्त होता है। जैसे—उलटना-पलटना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
पलटना  : अ० [सं० प्रलोटन] १. ऐसी स्थिति में आना या होना कि ऊपरी अंश या तल नीचे हो जाय और निचला अंश या तल ऊपर हो जाय। उलटा या औंधा होना। २. दशा, परिस्थिति आदि में होनेवाला इस प्रकार का बहुत बड़ा परिवर्तन कि उसका प्रवाह, रूख या रूप बिलकुल उलट जाय। अच्छी से बुरी या बुरी से अच्छी स्थिति को प्राप्त होना। ३. अपेक्षाकृत अवनत स्थिति को प्राप्त होना। ४. राज्य की सत्ता का एक के हाथ से निकलकर दूसरे के हाथ में जाना। जैसे—शासन पलटना। ५. पीछे या विपरीत दिशा की ओर जाना, घूमना या मुड़ना। ६. जहाँ से कोई चला हो, उसका उसी स्थान की ओर लौटना। वापस आना। ७. कही हुई या मानी हुई बातें मानने से पीछे हटना। मुकरना। जैसे—उन्हें पलटते देर नहीं लगती। संयो० क्रि०—जाना। स० १. उलटा या औंधा करना। २. आकार, रूप, दशा, स्थिति आदि को प्रयत्नपूर्वक बदल देना। बदलना। ३. अवनत को उन्नत या उन्नत को अवनत करना। ४. किसी को लौटने में प्रवृत्त करना। फेरना। ५. अदल-बदल करना। विशेष—यह उलटना के साथ उसका अनुकरण-वाचक रूप बनकर भी प्रयुक्त होता है। जैसे—उलटना-पलटना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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