प्रतिकूल/pratikool

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प्रतिकूल  : पुं० [सं० ब० स०] नदी का सामनेवाला अर्थात् उस ओर का कूल अर्थात् किनारा या तट। वि० [भाव० प्रतिकूलता] १. जो इस ओर या हमारे पक्ष में नहीं, बल्कि उस, दूरवर्ती या सामनेवाले पक्ष में हो। ‘अनुकूल’ का विपर्याय। २. (व्यक्ति) जो हमसे अलग या दूर रहकर हमारे कामों में बाधक होता हो। ३. (कार्य, वस्तु या स्थिति) जो किसी अन्य कार्य, वस्तु या स्थिति के मार्ग में बाधक होती हो। (एडवर्स) ४. रुचि, वृत्ति, स्वभाव आदि के विरुद्ध पड़ने या होनेवाला। जैसे—यहाँ का जलवायु हमारे लिए प्रतिकूल है। ‘अनुकूल’ का विपर्याय, उक्त सभी अर्थों में।
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प्रतिकूलता  : स्त्री० [सं० प्रतिकूल+तल्+टाप्] १. प्रतिकूल होने की अवस्था, गुण या भाव। विपरीतता। २. विरोध।
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प्रतिकूलत्व  : पुं० [सं० प्रतिकूल+त्व] प्रतिकूलता।
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प्रतिकूला  : स्त्री० [सं० प्रतिकूल+टाप्] सौत। सपत्नी।
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प्रतिकूलाक्षर  : पुं० [सं० प्रतिकूल-अक्षर, ब० स०] साहित्य में किसी प्रसंग के वर्णन में ऐसे खटकनेवाले अक्षरों या वर्णों का प्रयोग जो वस्तुत
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