प्रदीप-न्याय/pradeep-nyaay

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प्रदीप-न्याय  : पुं० [ष० त०] सांख्य का यह मत या सिद्धान्त कि जिस प्रकार आग, तेल और बत्ती के संयोग से प्रतीप या दीया जलता है, उसी प्रकार सत्त्व, रज और तम के सहयोग के शरीर से सब काम होते हैं।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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