प्रबोध/prabodh

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शब्द का अर्थ

प्रबोध  : पुं० [सं० प्र√बुध्+घञ्] [वि० प्रबुद्ध] १. सोकर उठना। जागना। २. किसी बात या विषय का ठीक और पूरा ज्ञान। यथार्थ ज्ञान। ३. किसी को समझा-बुझाकर शांत या स्थिर करना। ढारस। दिलासा। सांत्वना। ४. साहित्य में, दूत या दूती का नायिका या नायक को कोई बात अच्छी तरह और युक्तिपूर्वक समझाकर उत्साहित या शांत करना या सांत्वना देना। ५. चेतावनी। ६. विकास। ७. महाबुद्ध की एक अवस्था। (बौद्ध)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
प्रबोधक  : वि० [सं० प्र√बुध्+णिच्+ण्वुल्—अक] १. जगानेवाला। २. चेताने या सचेत करनेवाला। ३. समझाने-बुझानेवाला। ४. यथार्थ ज्ञान कराने या बतलानेवाला। ५. ढारस या सांत्वना देनेवाला।
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प्रबोधन  : पुं० [सं० प्र√बुध्+ल्युट्—अन, या णिच्+ल्युट्] १. जागरण। जागना। २. नींद से उठाना। जगाना। ३. यथार्थ ज्ञान। बोध। ४. बोध कराना। जताना। ५. सचेत या सावधान करना। ६. ढारस, तसल्ली या सान्त्वना देना। ७. विकसित करना।
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प्रबोधन  : [सं० प्रबोधन] १. सोये हुए को उठाना। जगाना। २. सचेत या सजग करना। ३. अच्छी तरह समझाना-बुझाना। ४. ढारस या सान्त्वना देना। उदा०—मंत्रिहि राम उठाइ प्रबोधा।—तुलसी। ५. अपने अनुकूल करने के लिए सिखाना-पढ़ाना। ६. आध्यात्मिक ज्ञान से युक्त करना।
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प्रबोधनी  : स्त्री० [सं० प्र√बुध्+णिच्+ल्युट्—अन, ङीप्]=प्रबोधिनी।
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प्रबोधित  : भू० कृ० [सं० प्र√बुध्+णिच्+क्त] १. जो जगाया गया हो। २. जिसे उपयुक्त ज्ञान दिया गया हो। ३. जिसे समझाया-बुझाया गया हो। ४. जिसे ढारस या सान्त्वना दी गई हो।
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प्रबोधिता  : स्त्री० [सं० प्रबोधित+टाप्] एक प्रकार की वर्णवृत्ति जिसके प्रत्येक चरण में सगण, जगण, सगण और अंत में गुरु (सजसजग) होता है। दे० ‘मंजुभाषिणी’।
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प्रबोधिनी  : स्त्री० [सं० प्र√बुध्+णिच्+णिनि+ङीप्] १. कार्तिक शुक्ला एकादशी। २. जवासा। धमासा।
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प्रबोधी (धिन्)  : वि० [सं० प्र√बुध्+णिच्+णिनि] [स्त्री० प्रबोधिनी] १. जगानेवाला। २. प्रबोधन करनेवाला। प्रबोधक।
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