प्रासंग/praasang

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प्रासंग  : पुं० [सं० √सन्ज् (सटना)+घञ्] १. हल का जूआ या जुआठा जिसमें नये बैल निकाले जाते हैं। २. तराजू की डंडी। ३. तराजू। तुला।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
प्रासंगिक  : वि० [सं० प्रसंग+ठञ्—इक] १. प्रसंग-संबंधी। प्रसंग का। २. प्रस्तुत प्रसंग से संबंध रखनेवाला। ३. किसी अवसर, विषय आदि के अनुकूल और प्रसंग-प्राप्त। (रेलेवेन्ट; उक्त दोनों अर्थों में) पुं० दृश्य काव्य में कथा-वस्तु के दो अंशों में से वह दूसरा अंश जो मूल या अधिकारिक अंश से प्रसंगात् सहायक होता है। दे० ‘आधिकारिक’ (दृश्य काव्य का)।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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