फिरना/phirana

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फिरना  : अ० [हिं० फिरना का अ०] १. किसी चीज का ऐसी स्थिति में आना, होना या लाया जाना कि वह किसी अक्ष या धुरी पर अथवा किसी विशिष्ट घेरे में या मार्ग पर घूमने या चक्कर खाने लगे। जैसे—(क) चक्की या पहिया फिरना। (ख) मनका या माला फिरना। २. किसी दिशा में घूमना या मुड़ना अथवा घुमाया या मोड़ा जाना। मुड़ना। जैसे—(क) ताले में ताली फिरना। (ख) यह गली आगे चलकर दाहिनी ओर फिर गयी है। ३. किसी मार्ग या पथ पर किसी का घूमना, विशेषतः बार-बार चक्कर लगाना। जैसे—गली में चोरों या शहर में सिपाहियों का फिरना। ४. जहाँ सेकोई चला हो उसका लौटकर फिर वही आना या पहुँचना। वापस लौटना। जैसे—साजन अब क्या फिरेंगे। ५. जो चीज जहाँ से आयी हो उसका वहीं वापस भेजा जाना। जैसे—बिका हुआ माल फिरना। ६. सूचना आदि के रूप में सबके सामने घुमाया जाना। जैसे—(क) डुग्गी या डोंगी फिरना। (ख) दुहाई फिरना। ७. घूम, मुड़ या पलटकर विरुद्ध दिशा में आना। जैसे—पीछे की ओर मुँह फिरना। मुहावरा—जी फिरना=चित्त विरक्त होना। ८. उन्मुख होना। जैसे—ध्यान फिरना। मुहावरा—किसी ओर फिरना=प्रवृत्त होना। ९. लाक्षणिक अर्थ में पहले से बिलकुल विपरीत स्थिति मे आना। दिशा बदलना। जैसे—(क) किस्मत फिरना। (ख) दिन फिरना। १॰. सामान्य या साधारण अवस्था की अपेक्षा हीन अवस्था को प्राप्त होना। जैसे—(क) बुद्धि फिरना। (ख) आँखें फिरना। (मर जाना) मुहावरा—सिर फिरना=बुद्धि भ्रष्ट होना। हर बात उलटी समझ मे आना। ११. कही हुई बात या दिये हुए वचन पर दृढ़ न रहना। मुकरना। १२.किसी तरल पदार्थ का पोता जाना। जैसे—कमरे में चूना या दरवाजों पर रंग फिरना। १३. धीरे से मला जाना। जैसे—सिर पर हाथ फिरना। १४. गुदा से गुह या विष्टा का त्यागा जाना। जैसे—झाड़ा या टट्टी फिरना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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