फैलाना/phailaana

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फैलाना  : स० [हिं० फैलना का स०] १. किसी को फैलने में प्रवृत्त करना। २. कोई चीज खींचकर उस विस्तार या सीमा तक ले जाना जहाँ तक वह जा सकती हो अथवा जहाँ तक उसे ले जाना आवश्यक या संगत हो। लम्बाई-चौड़ाई अथवा चौड़ाई के बल विस्तार बढ़ाना। पसारना। जैसे—(क) सुखाने के लिए पेड़ या रस्सी पर कपड़े फैलाना। (ख) कुछ पकड़ने या लेने के लिए हाथ फैलाना। ३. किसी चीज को तानते हुए आगे बढ़ना जैसे—(क) पक्षियों का पर फैलना। (ख) आराम से बैठने के लिए पैर फैलाना। ४. ऐसा काम करना जिससे कोई चीज आवश्यक या उचित से अधिक स्थान घेरे। बिखेरना। जैसे—चौकी पर तो तुमने कागज-पत्र पैला रखे है। ५. किसी पदार्थ के क्षेत्र मर्यादा सीमा आदि का विस्तार करना। बढ़ाना। जैसे—उन्होने अपना कार-बार सारे देश में फैला रखा है। ६. किसी प्रकार के घेरे या विवर का विस्तार बढ़ाना। जैसे—(क)कुछ लेने के लिए झोली फैलाना। (ख) दाँत उखाड़ने के लिए मुँह पैलाना। ७. ऐसी क्रिया करना जिससे दूर तक किसी प्रकार का परिणाम या प्रभाव पहुँचे। जैसे—यश (या सुगन्ध) फैलाना। ८. ऐसी क्रिया, करना जिससे दूर कर के लोगों को किसी बात की जानकारी या परिचय हो। जैसे—फूलों कासुगन्ध पैलाना। ९. ऐसी क्रिया करना जिससे किसी चीज का लोगों में यथेष्ट प्रचार या व्यवहार हो। उदाहरण—राज-काज दरबार में फैलावहु यह रत्न।—भारतेन्दु। १॰. कोई चीज ऐसी स्थिति में लाना कि उस पर विशेष रूप से या अधिक लोगों की दृष्टि पड़ या ध्यान आकृष्ट हो। जैसे—आडम्बर या ढोंग फैलाना। ११. गणित के क्षेत्र में, किसी प्रकार का लेखा या हिसाब तैयार करने के लिए अथवा तैयार किये हुए हिसाब की जाँच करने के लिए किसी प्रकार का परिकलन करना। जैसे—(क) ब्याज या सूद पैलाना। (ख) लागत फैलाना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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