बजाना/bajaana

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बजाना  : स० [हिं० बाजा] १. किसी चीज परइस प्रकार आघात करना कि उसमें से शब्द निकलने लगे। जैसे—(क) घंटा बजाना। (ख) ताली बजाना। २. कोई ऐसी विशिष्ट प्रक्रिया करना जिससे कोई वाद्य, सुर ताल लय आदि में शब्द करने लगे। जैसे—शहनाई या सितार बजाना। पद—बजाकर=डंका पीटकर। खुल्लमखुल्ला। मुहावरा—गाल बजाना=दे० ‘गाल’ के अन्तर्गत मुहा० । वर्दी बजाना-सैनिकों को कवायद आदि के लिए बुलाने के उद्देश्य से बिगुल बजाना। ३. लाठी सोंटे आदि से लड़ाई-झगड़ा करना। ४. पुकारना। बुलाना। (पूरब) ५. खरेपन आदि की परीक्षा के लिए किसी चीज को उछालकर पटकर अथवा उस पर आघात करके शब्द उत्पन्न करना। पद—ठोंकना-बजाना=(क) अच्छी तरह जाँचना या परखना। जैसे—जो चीज लो वह ठोंक-बजाकर लिया करो। (ख) बात या व्यक्ति के संबंध में प्रामाणिकता, सत्यता आदि का निश्चय करना। जैसे—उन्हें अच्छी तरह ठोंक-बजाकर देख लो। कही ऐसा न हो, कि वे पीछे मुकर जायँ। ५. आघात या प्रहार करना। मारना-पीटना। जैसे—जूते बजाना। ६. स्त्री के साथ प्रसंग या सम्भोग करना। (बाजारू) स० [फा० बजा+ना (प्रत्यय)] पालन करना। जैसे—ताबेदारी बाजाना, हुकुम बजाना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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