बहुदेव-वाद/bahudev-vaad

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बहुदेव-वाद  : पुं० [सं० बहु-देव, कर्म० स० बहुदेव-वाद, ष० त०] यह मत या सिद्धान्त कि धर्म में बहुत से छोटे बड़े देवता और देवियाँ होती है और समाज में लोग अपनी-अपनी रुचि के अनुसार उनमें से किसी न किसी के उपासक होते हैं। (पॉलीथीज्म) विशेष—यह एकेश्वरवाद से भिन्न और प्रायः उसका विरोधी है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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