वितृष्णा/vitrshna

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वितृष्णा  : स्त्री० [सं० कर्म० स०] [भाव० वितृष्ण] १. मन में किसी बात की तृष्णा न रह जाना। तृष्णा का अभाव। २. बुरी या विकट तृष्णा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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