शोशा/shosha

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शोशा  : पुं० [फा० शोशः] १. आगे निकली हुई नोक। २. किसी बात में निकाली हुई कोई ऐसी अनोखी और नई शाखा जो उसे किसी दूसरी ओर प्रवृत्त कर सकती होया उसमें कोई त्रुटि दिखलाती हो। मुहा०—शोशा निकालना=कोई दोष दिखाते हुए साधारण आपत्ति खड़ी करना। ३. कोई व्यंग्यपूर्ण या झगड़ा लगानेवाली बात कहना। क्रि० प्र०—छोड़ना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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