संप्रवर्तन/sampravartan

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संप्रवर्तन  : पुं० [सं० सम्-प्र√वृत (वर्तमान रहना)+ण्वुल्-अन] [वि० संप्रवर्तनीय] १. गीति देना। चलाना। २. घुमाव। मोड़ना। ३. जारी या प्रचलित करना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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