संश्लेष/sanshlesh

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शब्द का अर्थ

संश्लेष  : पुं० [सं०√श्लिष (मिलाना)+घञ] १. मिलने या मिलाए जाने की क्रिया या भाव। २. गले लगाना। आलिंगन। परिरम्भण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
संश्लेषक  : वि० [सं०] संश्लेषण या संश्लेष करनेवाला।
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संश्लेषण  : पुं० [सम्√श्लिष (मिलाना)+ल्युट्-अन] [वि० संश्लेषणीय, भू० कृ० संश्लेषित, संश्लिष्ट] १. किसी के साथ जोड़ना, मिलाना या लगाना। २. टाँगना या लटकाना। ३. वह जिससे कुछ जोड़ा या बाँधा जाय। बंधन। ४. कार्य से कारण अथवा किसी नियम या सिद्धान्त से किसी चीज या बात के परिणाम का फल या विचार करना। मिलान करना। ‘विश्लेषण’ का विपर्याय। (सिन्थेसिस) ५. भाषा-विज्ञान में, वह स्थिति जिसमें किसी पद से अर्थ का भी और पर-सर्ग आदि के द्वारा संबंध का भी बोध होता है। जैसे—‘मेरा’ शब्द में ‘मैं’ वाले अर्थ तत्व के सिवा ‘रा’ पर सर्ग के कारण संबंध सूचक तत्व भी सम्मिलित है। (एग्लूटिनेशन) विशेष—संस्कृत व्याकरण में इसी तत्व या प्रक्रिया को ‘सामर्थ्य’ कहते हैं।
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संश्लेषित  : भू० कृ० [सम्√श्लिष (मिलाना)+णिच्-क्त] जिसका संश्लेषण किया गया हो या हुआ हो।
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संश्लेषी  : वि० [सम्√श्लिष (मिलाना)+इनि] [स्त्री० संश्लेषिणी] संश्लेषक।
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