संसृष्टि/sansrshti

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संसृष्टि  : स्त्री० [सम० सम्√सृज (बना)+क्तिव+षत्व स्टुत्व] १. सृसष्ट होने की अवस्था, गुण या भाव। २. घनिष्ठता। हेल-मेल। ३. मिलावट। मिश्रण। ४. लगाव। संबंध। ५. बनावट। रचना। ६. संग्रह। ७. धर्म-शास्त्र में बँटवारा या विभाजन हो जाने पर भी परिवारों का फिर मिलकर एक हो जाना। ८. साहित्य में, दो या अधिक काव्यालंकारों का इस प्रकार संसृष्ट होना। या साथ-साथ हो जाना। कि वे सब अलग-अलग दिखाई दें। इसकी गणना एक स्वतंत्र अलंकार के रूप में होती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
संसृष्टि (ष्टिन)  : पुं० [सं० सृष्ट+इनि] धर्मशास्त्र में, ऐसे परिवार या संबंधी जो विभाजन हो चुकने पर भी मिलकर एक हो गये हों।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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