समझदार/samajhadaar

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समझदार  : वि० [हिं० समझ+फा० (प्रत्य०)] १. वह जो कुछ सामने हो उसे ध्यान में रखकर उसके आशय, प्रकार, स्वरूप आदि से अवगत होना। ठीक औक पूरा ज्ञान प्रापात करना। जैसे—पहले यह तो समझ लो कि बात क्या है ? २. किसी बात का स्वरूप आदि देखकर उसके संबंध की दूसरी आवश्यक बातों का अनुमान या कल्पना करना। (डीम) क्रि० प्र०—जाना।—पड़ना।—रखना—लेना। पद—समझ बूझकर=अच्छी तरह ज्ञान, परिचय आदि प्राप्त करके। सारी स्थिति अच्छी तरह जान कर। जैसे—समझकर मैंने ही तुम्हे वहाँ जाने से मना किया था। मुहा—(अपने आपको) कुछ समझना=अपने मन में यह अभिमान पूर्ण भाव रखना कि हममें भी कुछ विशिष्ट योग्यता है। ३. किसी के व्यवहार के बदले में उसके साथ वैसा ही व्यवहार करना। जैसे—कोई कहीं समझता है, कोई कहीं। मुहा०—(किसी से) समझना या समझलेना= (क) निपटारा या समझौता करना। जैसे—दोनो को आपस में समज लेने दो। (ख) अनिष्ट, अपकार, अपमान आदि का उचित और उपयुक्त बदला लेना। जैसे—अच्छा हम भी तुमसे समझ लेगें।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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