साम्य/saamy

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साम्य  : पुं० [सं०] समान होने का भाव। समानता। जैसे—इन दोनों पुस्तकों में बहुत कुछ साम्य है।
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साम्यता  : स्त्री०=साम्य।
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साम्यवाद  : पुं० [सं० साम्य+√वद् (कहना)+घञ्] मार्क्स द्वारा प्रतिष्ठित तथा लेनिन द्वारा संबंधित वह विचारधारा जो व्यक्ति के बदले सार्वजनिक उत्पादन, प्रबंध और उपयोग के सिद्धान्त पर समाज-व्यवस्था स्थिर करना चाहती है और इसकी सिद्धि के लिए हर संभव उपाय से शोषित वर्ग को सशक्त करना चाहती है। (कम्युनिज्म)
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साम्या  : स्त्री० [सं०] साधारण न्याय के अनुसार सब लोगों के साथ निष्पक्ष और समान भाव से किया जानेवाला व्यवहार। समदर्शितापूर्ण व्यवहार। (इक्विटी)
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साम्यामूलक  : वि० [सं० साम्या+मूलक] जिसमें साम्या या समदर्शिता का पूरा-पूरा ध्यान रखा गया हो। साम्यिक। (ईक्विटेबुल)
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साम्यावस्था  : स्त्री० [सं०] १. दार्शनिक क्षेत्र में, वह अवस्था जिसमें सत्त्व, रज और तम तीनों गुण बराबर हों; उनमें किसी प्रकार का विकार या वैषम्य न हो। प्रकृति। २. आज-कल लौकिक क्षेत्र में, वह अवस्था या स्थिति जिसमें परस्पर विरोधी शक्तियाँ इतनी तुली हों कि एक दूसरी पर अपना अनिष्ट प्रभाव डालकर कोई गड़बड़ी उत्पन्न न कर सकें। (ईक्विलिब्रियम)
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साम्यिक  : वि० [सं०]=साम्या-मूलक।
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