सारस्वत/saarasvat

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सारस्वत  : वि० [सं०] १. सरस्वती से संबंध रखने वाला। सरस्वती का। २. विद्या, विद्वुत्ता, शास्त्रीय ज्ञान आदि से संबंध रखने वाला। शास्त्रीय (एकेडेमिक) ३. सरस्वती नदी से संबंध रखने या उसके आस-पास होने वाला। ४. सारस्वत देश या जाति से संबंध रखने वाला। पुं० १. प्राचीन भारत में सरस्वती नदी के दोनों तटो पर का प्रदेश जो आधुनिक दिल्ली के उत्तर-पश्चिम में पड़ता है और जो अब पंजाब का दक्षिणी भाग है। प्राचीन आर्यो का यही पवित्र मूल-निवास-स्थान था। २. उत्तर प्रदेश में बसने वाले ब्राह्मणो और उनके वंशजों की संज्ञा। ३. एक मुनि जो सरस्वती नदी के पुत्र कहे गये हैं। ४. वैधक में, एक प्रकार का चूर्ण जो उन्माद, प्रमेह, वायु-विकार आदि में गुणकारी माना जाता है। ५. पुराणानुसार सरस्वती को प्रसन्न करने के उद्देश्य से किया जाने वाला हर प्रकार का व्रत जो प्रति रविवार या प्रति पंचमी को किया जाता है। कहते हैं कि यह व्रत करने से आदमी बहुत बड़ा विद्वान और भाग्यवान् होता है।
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सारस्वती  : वि०=सारस्वतीय। स्त्री०=सरस्वती।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
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सारस्वतीय  : वि० [सं० सरस्वती+घण्—ईय] १. सरस्वती का सरस्वती संबंधी। २. सारस्वत का।
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सारस्वतोत्सव  : पुं० [सं० कर्म० स०] १. एक प्राचीन उत्सव जिसमें सरस्वती का पूजन होता था। २. आज-कल बसंत पंचमी को होने वाला सरस्वती-पूजन।
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सारस्वत्य  : वि० [सं० सरस्वती+ष्यञ्] सरस्वती का। सरस्वती संबंधी। पुं० सरस्वती का पुत्र जिसे राजशेखर ने काव्य पुरुष कहा है। विशेष—महाभारत में कथा है कि भगवान ने सरस्वती को एक पुत्र इसलिये दिया था कि वह वेदों का अध्ययन करके संसार में उनका प्रचार करे। वही सारस्वत्य के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
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